दुर्ग, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में संभावित हवाई हमले जैसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी को लेकर व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट दुर्ग कैंपस में आयोजित इस अभ्यास में एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस वालेंटियर्स, एनसीसी और होमगार्ड के जवानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में घबराने के बजाय नागरिकों और सुरक्षा बलों को सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया देने और बचाव कार्यों के लिए तैयार करना था। अभ्यास के दौरान एयर रेड सायरन बजाकर आपात स्थिति का संकेत दिया गया, जिसके बाद राहत एवं बचाव कार्यों की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया।
ड्रिल के दौरान एसडीआरएफ की टीमों ने घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, प्राथमिक उपचार देने और ऊंची इमारतों में फंसे लोगों को रस्सी और स्ट्रेचर की मदद से नीचे उतारने का अभ्यास किया। साथ ही अग्निशमन विभाग की टीमों ने आगजनी की स्थिति पर काबू पाने का प्रदर्शन किया। ब्लैकआउट की स्थिति में कम रोशनी के बीच संचार व्यवस्था बनाए रखने और अनुशासन के साथ काम करने का प्रशिक्षण भी दिया गया।
इस पूरे अभ्यास में वालेंटियर्स की भूमिका भी अहम रही, जिन्होंने भीड़ नियंत्रण, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और आपातकालीन निर्देशों का पालन करवाने में सहयोग किया। मॉक ड्रिल के जरिए यह भी समझाया गया कि किसी भी आपदा या हमले की स्थिति में आम नागरिकों को किस तरह सतर्क रहकर अपनी और दूसरों की जान बचानी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल, कलेक्टर अभिजीत सिंह, अग्निशमन अधिकारी नागेन्द्र सिंह सहित कई विभागीय अधिकारी और स्थानीय स्वयंसेवक मौजूद रहे।
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर इस प्रकार की मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति या आतंकी हमले की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके और नागरिकों को पहले से प्रशिक्षित किया जा सके। वहीं सिविल डिफेंस वालेंटियर सपना मंडल और निधि सोनी ने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें आपदा की स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव मिला है।
सांसद विजय बघेल ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल समय की आवश्यकता है और इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी बेहद जरूरी है, ताकि हर व्यक्ति आपात स्थिति में खुद को और दूसरों को सुरक्षित रखने में सक्षम बन सके।
यह मॉक ड्रिल न केवल आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने का जरिया बनी, बल्कि आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने और आपात स्थिति में सही प्रतिक्रिया देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुई।


