धर्मेन्द्र सिंह सुकमा
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में उस समय उत्सव जैसा माहौल बन गया, जब क्रिकेट जगत के दिग्गज Sachin Tendulkar ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर के छिंदनार गांव का दौरा किया। उनकी मौजूदगी ने न सिर्फ बच्चों बल्कि पूरे इलाके में नई उम्मीद और ऊर्जा भर दी।
इंद्रावती नदी के किनारे बसे इस छोटे से गांव में जैसे ही सचिन पहुंचे, मैदान तालियों और “सचिन-सचिन” के नारों से गूंज उठा। बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी—मानो उनका सपना हकीकत बन गया हो।
बच्चों के साथ खेले, दिया आगे बढ़ने का संदेश
सचिन ने कार्यक्रम को औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि बच्चों के साथ खुलकर समय बिताया। उन्होंने रस्साकशी और वॉलीबॉल जैसे खेलों में हिस्सा लेकर बच्चों का उत्साह दोगुना कर दिया। इस दौरान उनकी बेटी सारा तेंदुलकर और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे, जिससे माहौल और भी खास बन गया।
100 से अधिक खेल मैदान बनाने का ऐलान
कार्यक्रम के दौरान सचिन ने एक बड़ा वादा किया। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में 100 से ज्यादा खेल मैदानों के निर्माण में सहयोग दिया जाएगा। उनका मानना है कि यहां प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच और संसाधन की जरूरत है।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके जीवन की शुरुआत भी एक छोटे से मैदान से हुई थी, इसलिए वे जानते हैं कि खेल का सही माहौल कितना जरूरी होता है।
‘बस्तर में छिपे हैं हजारों हीरे’
सचिन ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि बस्तर की धरती प्रतिभाओं से भरी हुई है। जरूरत सिर्फ उन्हें तराशने की है। उन्होंने खेल के साथ-साथ शिक्षा पर भी बराबर ध्यान देने की सलाह दी और कहा कि सही मार्गदर्शन से यहां के बच्चे देश-दुनिया में नाम कमा सकते हैं।
शिक्षकों और कोचिंग पर भी जोर
उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे खेल की बारीकियों को बेहतर तरीके से समझाकर बच्चों को आगे बढ़ा सकें। इस पहल में विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
बच्चों को दी जीवन की सीख
बच्चों से बातचीत के दौरान सचिन ने दोस्ती और जीवन के मूल्यों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि एक सच्चा दोस्त आईने और परछाई की तरह होना चाहिए—जो सच्चाई दिखाए और हर परिस्थिति में साथ निभाए।
पिता की सीख को किया याद
अपने बचपन का जिक्र करते हुए सचिन ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें हमेशा अच्छा इंसान बनने की सीख दी। उन्होंने कहा कि खेल का करियर सीमित होता है, लेकिन इंसानियत और अच्छे काम हमेशा याद रखे जाते हैं।
बस्तर की बदलती पहचान
इस दौरे ने यह साफ संकेत दिया कि बस्तर अब सिर्फ अपने पुराने हालात के लिए नहीं, बल्कि नई सोच, खेल और प्रतिभा के लिए भी पहचाना जाएगा। यहां के युवाओं ने भी विश्वास जताया कि अब क्षेत्र की पहचान खेल और प्रकृति से होगी, न कि नक्सलवाद से।


