कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में हुए आईईडी ब्लास्ट ने सिर्फ चार जवानों की जान नहीं ली, बल्कि चार घरों की खुशियां भी हमेशा के लिए छीन लीं। पूरे इलाके में मातम पसरा है, लेकिन सबसे ज्यादा दर्द उस घर में है जहां अभी कुछ दिन पहले ही शादी की खुशियों की शुरुआत हुई थी… और आज वहां सिर्फ सिसकियां बची हैं।
हराडुला गांव के रहने वाले शहीद जवान संजय कुमार गढ़पाले… जिनकी जिंदगी अभी एक नए मोड़ पर कदम रखने वाली थी। महज 15 दिन पहले ही उनकी सगाई हुई थी। घर में शादी की तैयारियों को लेकर चर्चा शुरू हो चुकी थी। जनवरी 2027 की तारीख तय थी… लेकिन किसे पता था कि दूल्हा बनने का सपना देखने वाला बेटा, तिरंगे में लिपटकर घर लौटेगा।
14 फरवरी 1997 को जन्मे संजय एक साधारण परिवार से थे, लेकिन उनके सपने बहुत बड़े थे। बचपन से ही देश सेवा का जज्बा उनके दिल में था। यही जुनून उन्हें बस्तर फाइटर तक ले गया। 9 फरवरी 2022 को उन्होंने वर्दी पहनी और उसके बाद लगातार नक्सल विरोधी अभियानों में डटे रहे। हर बार घर से निकलते वक्त मां की आंखों में चिंता होती थी, लेकिन बेटे की बहादुरी पर गर्व भी उतना ही था।
चार सदस्यों के इस छोटे से परिवार में संजय सबसे बड़े बेटे थे। पिता सुरेश गढ़पाले गांव में एक छोटी सी साइकिल दुकान चलाकर परिवार का गुजर-बसर करते हैं। उन्होंने अपने बेटे को बड़े अरमानों से पाला था। अभी कुछ दिन पहले ही बेटे की सगाई कर उन्होंने उसकी नई जिंदगी की नींव रखी थी… लेकिन अब वही पिता अपने जवान बेटे की शहादत पर टूट चुके हैं।
गांव हराडुला में सन्नाटा पसरा है। हर गली, हर घर में बस एक ही चर्चा-“संजय अब नहीं रहा…”। मां की चीखें, पिता की नम आंखें और परिजनों का बिलखना… हर किसी का दिल दहला रहा है। जिस घर में शादी के गीत गूंजने वाले थे, वहां अब सिर्फ मातम की आवाजें हैं।
संजय अब इस दुनिया में नहीं हैं… लेकिन उनकी शहादत हमेशा याद रखी जाएगी। वो बेटा जिसने अपने सपनों से पहले देश को चुना… वो दूल्हा जो बारात नहीं ले जा सका… लेकिन तिरंगे में लिपटकर पूरे देश को गर्व से भर गया।


