रिपोर्टर-धर्मेन्द्र सिंह
नक्सलवाद के लंबे दौर से जूझने वाला सुकमा जिला अब शांति और विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। घने जंगलों, प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध जनजातीय संस्कृति से सजा छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल, जो कभी नक्सल हिंसा की वजह से सुर्खियों में रहता था, आज बदलती तस्वीर के साथ एक नए युग की ओर बढ़ रहा है। विशेषकर दक्षिण बस्तर (सुकमा क्षेत्र), जो कभी भय और असुरक्षा का प्रतीक माना जाता था, अब धीरे-धीरे विश्वास, विकास और स्थिरता की पहचान बनता जा रहा है।
इस बदलाव की मजबूत नींव उन वीर जवानों की शहादत पर टिकी है, जिन्होंने बुरकापाल जैसे दुर्गम इलाकों में देश की एकता और सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इन्हीं अमर बलिदानों को स्मरण करते हुए दोरनापाल स्थित 74वीं बटालियन मुख्यालय में वर्ष 2017 की बुरकापाल घटना में शहीद हुए 25 जवानों की स्मृति में निर्मित ‘शहीद स्मारक’ का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद स्मारक का अनावरण किया। इस दौरान पूरा परिसर श्रद्धा और भावनाओं से भरा रहा। मौजूद अधिकारियों और जवानों ने शस्त्र झुकाकर अपने वीर साथियों को सलामी दी और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर वर्ष 2017 की उस दर्दनाक घटना को भी याद किया गया, जब दोरनापाल-जगरगुंडा मार्ग निर्माण के दौरान नक्सलियों ने कायराना हमला किया था, जिसमें 25 जवान शहीद हो गए थे। उस समय यह इलाका नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता था और सड़क निर्माण जैसे कार्य भी बेहद जोखिम भरे होते थे।
आज वही सुकमा और पूरा दक्षिण बस्तर नक्सल मुक्ति की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। अधिकारियों ने कहा कि यह परिवर्तन उन शहीद जवानों के बलिदान का परिणाम है, जिन्होंने इस क्षेत्र के हर पत्थर को अपने खून से सींचकर विकास का रास्ता तैयार किया। अब यहां सड़कों का जाल बिछ रहा है, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।
सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने इस अवसर पर कहा कि सुकमा अब नक्सलवाद के दंश से उबरकर विकास की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा, “हमारे जवानों की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह स्मारक उनके प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।”
कार्यक्रम के बाद डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित, कमांडेंट हिमांशु पांडे और कमांडेंट कुमार मयंक बुरकापाल स्थित वास्तविक घटनास्थल पर भी पहुंचे। वहां मौजूद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उपस्थित जवानों ने संकल्प लिया कि वे शहीदों के आदर्शों पर चलते हुए राष्ट्र सेवा के लिए सदैव समर्पित रहेंगे।
सुकमा में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल शहीदों को नमन करने का अवसर बना, बल्कि यह संदेश भी देता है कि संघर्षों और बलिदानों से गुज़रकर अब छत्तीसगढ़ का सुंदर बस्तर शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में एक नई कहानी लिख रहा है-जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां अब उम्मीद और प्रगति की आवाज सुनाई दे रही है।


