छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में हनीट्रैप के जरिए रची गई नाबालिग के अपहरण की सनसनीखेज साजिश का पुलिस ने चंद घंटों में खुलासा कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 14 वर्षीय बच्चे को सकुशल बरामद किया और इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस साजिश का मास्टरमाइंड पीड़ित परिवार का ही परिचित और रिश्ते में भांजा निकला।
दुर्ग पुलिस के अनुसार 12 अप्रैल 2026 को थाना अमलेश्वर में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके नाबालिग पुत्र को मोटरसाइकिल बनवाने के बहाने तिरंगा चौक, अमलेश्वर बुलाया गया था। वहां से अज्ञात आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया।
अपहरण के बाद आरोपियों ने मोबाइल फोन के माध्यम से परिवार से संपर्क कर एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की और धमकी दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल थाना अमलेश्वर, साइबर सेल और एसीसीयू की संयुक्त टीम गठित की।
पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मुखबिर की सूचना के आधार पर जांच शुरू की। शुरुआती जांच में ही अहम सुराग मिले, जिससे आरोपियों की पहचान स्पष्ट हो गई।
जांच के दौरान पता चला कि आरोपी धमतरी जिले में छिपे हुए हैं। इसके बाद दुर्ग पुलिस ने धमतरी पुलिस के साथ समन्वय कर संयुक्त कार्रवाई की और घेराबंदी कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही अपहृत नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया गया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस पूरे अपहरण की साजिश का मास्टरमाइंड संजय साहू है, जो पीड़ित परिवार का परिचित और रिश्ते में भांजा है। उसने महिला आरोपी हेम पुष्पा साहू की मदद से हनीट्रैप का जाल बिछाया और अन्य साथियों के साथ मिलकर बच्चे का अपहरण किया।
आरोपियों का मकसद आर्थिक लाभ कमाना और फिरौती वसूलना था। उन्होंने पहले बच्चे को झांसे में लिया और फिर उसे अपने साथ ले जाकर परिवार को धमकाकर एक करोड़ रुपये की मांग की।
थाना अमलेश्वर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2), 140(3), 351(3) और 61 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह एक सुनियोजित आपराधिक साजिश थी, जिसे हनीट्रैप के जरिए अंजाम दिया गया। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से नाबालिग को सुरक्षित बचा लिया गया और बड़ी घटना टल गई।


