नारायणपुर। कभी नक्सल प्रभाव और भय के लिए पहचान रखने वाला अबूझमाड़ अब बदलाव की राह पर है। इसी बदलाव की एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है, जहां समय पर मदद मिलने से एक गर्भवती महिला ने सुरक्षित रूप से एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
जानकारी के अनुसार, अबूझमाड़ के सुदूर इलाके में स्थित इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के अंदर बसे बोटेर गांव की एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। इलाके की दुर्गमता और पहले नक्सल गतिविधियों के कारण यहां स्वास्थ्य सेवाएं समय पर पहुंचना मुश्किल हुआ करता था।

हालांकि, इस बार हालात बदले हुए थे। सूचना मिलते ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की टीम ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। जवानों ने महिला को स्ट्रेचर के जरिए घने जंगलों और कठिन रास्तों से निकालकर सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया।समय पर इलाज मिलने से महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।यह घटना न केवल एक परिवार के लिए खुशी की खबर है, बल्कि यह संकेत भी है कि अबूझमाड़ जैसे सुदूर और पहले उपेक्षित इलाकों में भी धीरे-धीरे स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हो रही हैं।बदलते बस्तर की ये तस्वीर उम्मीद जगाती है, जहां कभी डर था, अब जीवन सुरक्षित हो रहा है।


