जहां कभी डर का साया था, वहां अब विकास की रौशनी फैली-पुवर्ती की नई पहचान
धर्मेन्द्र सिंह सुकमा
छत्तीसगढ़/ कभी सुकमा जिले का पुवर्ती गांव नक्सलवाद के केंद्र के रूप में जाना जाता था। जंगलों के बीच बसे इस छोटे से गांव में एक समय ऐसा था जब प्रशासन का कदम रखना भी मुश्किल था। गोलियों की आवाज, खौफ का माहौल और अस्थिर जीवन—यह गांव इन सबका प्रतीक बन चुका था। लेकिन आज, वही पुवर्ती उम्मीद, बदलाव और विकास की मिसाल पेश कर रहा है।
सुकमा जिला प्रशासन की सक्रियता और शासन की दृढ़ नीतियों ने वह कर दिखाया जो वर्षों से असंभव माना जाता था। अब पुवर्ती गांव न सिर्फ नक्सलवाद की छाया से बाहर निकल चुका है, बल्कि विकास की दिशा में तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और योजनाओं के लाभ से गांव के चेहरे पर नई चमक दिख रही है।
जनगणना 2026 के प्रथम चरण में जब पूरी जानकारी एकत्र की गई, तब यह देखना प्रेरणादायी था कि यही पुवर्ती गांव सुकमा जिले का पहला पूर्ण जनगणना गांव बना। उल्लेखनीय है कि यह उपलब्धि मात्र तीन दिनों में हासिल की गई। प्रगणक जवाराम पटेल ने रिकॉर्ड समय में सर्वे पूरा किया, जिसके लिए कलेक्टर अमित कुमार ने उन्हें कलेक्टर कक्ष में सम्मानित किया।
जहां पहले नक्सल कमांडर मांडवी हिड़मा की छाया मंडराती थी, अब वहां बच्चों की पढ़ाई की गूंज और किसानों के खेतों में हरियाली की चमक है। ग्रामवासी अब स्वयं को सरकार का हिस्सा महसूस कर रहे हैं-वे सुझाव दे रहे हैं, योजनाओं में सहयोग कर रहे हैं, और विकास की प्रक्रिया में गर्व से शामिल हो रहे हैं।
पुवर्ती का यह बदलाव सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि सुकमा और बस्तर के पुनर्जागरण की कहानी है। यह प्रमाण है कि संवाद और विश्वास की राह से ही बदलाव संभव है। नक्सल प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने जब विकास को सुरक्षा से जोड़ा, तब नतीजे खुद बोलने लगे।
आज पुवर्ती गांव बताता है कि अगर इच्छाशक्ति सच्ची हो और जनता का साथ मिल जाए, तो कोई भी “लाल गलियारा” हरा-भरा “विकास का गलियारा” बन सकता है।

यह तस्वीर सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में विकास की नई कहानी बयाँ करती है। जहाँ पहले नक्सलवाद का भय और असुरक्षा का माहौल था, वहीं अब लोगों के चेहरों पर आत्मविश्वास और उम्मीद की मुस्कान है।
चित्र में जनगणना कार्य से जुड़े प्रगणक जवाराम पटेल ग्रामीणों के साथ खड़े हैं-यह वही टीम है जिसने रिकॉर्ड तीन दिनों में जनगणना का कार्य पूरा किया और पुवर्ती को सुकमा का पहला पूर्ण जनगणना गांव बनाया।
यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बस्तर संभाग के परिवर्तन की झलक है-जहां अब बंदूक की जगह कलम और विकास की योजनाओं ने जगह ले ली है, और हर घर में अब भविष्य की नई रोशनी जलने लगी है।


