रायपुर/दुर्ग/बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। दुर्ग में हालिया छापेमारी के बाद अब ED की टीम ने राज्य के कई प्रमुख शहरों—बिलासपुर, रायपुर, कोरबा और अंबिकापुर-में एक साथ दबिश देकर हड़कंप मचा दिया है। इस व्यापक कार्रवाई को राज्य में चल रही कथित आर्थिक अनियमितताओं और बड़े घोटालों की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।
इसी क्रम में ED की एक टीम ने दुर्ग में बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए भाजपा नेता, ठेकेदार और अमर इंफ्रा के संचालक चतुर्भुज राठी के महेश कॉलोनी स्थित निवास पर सुबह-सुबह छापा मारा। अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चर्चा का माहौल बन गया।
सूत्रों के मुताबिक, टीम ने मौके पर पहुंचते ही घर को अपने कब्जे में लेकर दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी। संपत्ति से जुड़े कागजात, बैंकिंग लेन-देन, निवेश और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह पूरी कार्रवाई छत्तीसगढ़ में भारत माला परियोजना से जुड़े कथित जमीन घोटाले की जांच के सिलसिले में की जा रही है। ED यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन अधिग्रहण, मुआवजा और निवेश के दौरान कहीं बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं या मनी लॉन्ड्रिंग तो नहीं हुई।
उधर बिलासपुर में भी ED की टीम ने शहर के चर्चित सराफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के घर और दुकान पर एक साथ दबिश दी। सुबह से चल रही इस कार्रवाई के चलते पूरे इलाके में हलचल मच गई है और लोगों की भीड़ मौके के आसपास जमा हो गई।
मध्यनगरी चौक स्थित श्रीराम ज्वेलर्स और कारोबारी के आवास पर ED अधिकारियों ने एक साथ जांच शुरू की। टीम द्वारा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कैश ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, अकाउंट बुक और डिजिटल डाटा की बारीकी से जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, विवेक अग्रवाल के भाई विकास अग्रवाल का नाम पहले से ही चर्चित शराब घोटाले में सामने आ चुका है। उसे कथित तौर पर कारोबारी अनवर ढेबर का करीबी माना जाता है और करीब 2000 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले के सिंडिकेट से जुड़ा होने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि विकास अग्रवाल फिलहाल फरार है और एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हुई हैं।
ED की टीमें इस पूरी कार्रवाई के दौरान वित्तीय नेटवर्क, संपत्ति निवेश, फर्जी कंपनियों और संदिग्ध लेन-देन की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि कहीं इन मामलों के जरिए अवैध धन को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रिंग) की कोशिश तो नहीं की गई।
एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डाटा को खंगालकर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जा सके।
कार्रवाई के दौरान सभी जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय पुलिस बल को भी तैनात किया गया है, ताकि जांच प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए।
हालांकि, इस पूरी कार्रवाई को लेकर ED की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन जिस तरह से एक साथ कई शहरों में दबिश दी गई है, उससे साफ है कि एजेंसी इस मामले को लेकर काफी गंभीर है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।


