धमतरी,छत्तीसगढ़ ।
जब सपनों का बोझ उम्मीदों से ज्यादा भारी हो जाए और असफलता बार-बार दिल को तोड़ती रहे, तब उसका असर कितना घातक हो सकता है, इसका एक दर्दनाक उदाहरण धमतरी से सामने आया है। यहां एक युवक, जिसने बचपन से भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना संजोया था, उसी सपने के टूटने के दर्द को सहन नहीं कर पाया और अपनी जिंदगी खत्म कर ली।
यह घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत गुजराती कॉलोनी, पतंजलि नगर की है, जहां 26 वर्षीय युवक यशवंत साहू का शव उसके ही घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और देखते ही देखते लोगों की भीड़ जुट गई। परिजनों और आसपास के लोगों के अनुसार, यशवंत बचपन से ही भारतीय सेना में जाने के लिए जुनूनी था। वह देश सेवा का जज्बा रखता था और इसी लक्ष्य को लेकर उसने अपनी पढ़ाई और शारीरिक तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी। सुबह-शाम कड़ी मेहनत, दौड़-भाग, एक्सरसाइज और लिखित परीक्षा की तैयारी-उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके थे।
लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया। कई बार प्रयास करने के बावजूद उसे सफलता नहीं मिल सकी। हर असफलता उसके आत्मविश्वास को धीरे-धीरे तोड़ती गई और वह गहरे मानसिक तनाव व अवसाद में चला गया। बताया जा रहा है कि बेरोजगारी और लगातार मिल रही असफलताओं का दबाव यशवंत के मन पर इतना बढ़ गया था कि वह अंदर ही अंदर घुटने लगा। उसने अपने दर्द को किसी से साझा भी नहीं किया और आखिरकार उसी तनाव के चलते उसने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस आत्मघाती कदम के पीछे कोई और वजह तो नहीं था।
यशवंत की मौत ने एक बार फिर समाज के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं-क्या हमारे युवा असफलता को संभाल पाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं? क्या बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव उन्हें भीतर से तोड़ रहा है?
आज जरूरत है कि ऐसे युवाओं को सिर्फ पढ़ाई और नौकरी की तैयारी ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और भावनात्मक सहारा भी दिया जाए, ताकि कोई और यशवंत इस तरह अपनी जिंदगी न गंवाए।
इस घटना के बाद यशवंत का परिवार पूरी तरह टूट चुका है। जिस घर में कभी हंसी-खुशी का माहौल था, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है। पड़ोसी और रिश्तेदार भी स्तब्ध हैं और हर किसी की जुबान पर यही सवाल है-“आखिर इतनी बड़ी त्रासदी क्यों?”


