“कंधे पर हनुमान की ध्वजा, दिल में राम का नाम… 1400 KM की तपस्या पर निकला भक्त”
बालोद/कुसुमकसा।
भीषण गर्मी और 41–42 डिग्री तापमान के बीच एक अनोखी आस्था यात्रा सामने आई है। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के पास एक गांव के रहने वाले 45 वर्षीय सीताराम प्रभु श्री रामलला के दर्शन के लिए करीब 1400 किलोमीटर की पदयात्रा पर निकले हैं। उनकी मंज़िल है अयोध्या, जहां स्थित राम मंदिर अयोध्या देशभर के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था केंद्र है।
नाम में ही ‘सीता-राम’, अनोखा संयोग
इस यात्रा की विशेष बात यह है कि भक्त का नाम ही “सीताराम” है, जिसमें माता सीता और भगवान राम दोनों के नाम शामिल हैं। ऐसे में यह यात्रा एक प्रतीकात्मक महत्व भी रखती है।
नंगे पांव कर रहे यात्रा
सीताराम नंगे पांव तपती सड़कों पर यात्रा कर रहे हैं। कंधे पर भगवान हनुमान की तस्वीर वाली धर्म ध्वजा लेकर वे लगातार आगे बढ़ रहे हैं। गर्मी और लंबी दूरी के बावजूद उनका संकल्प कायम है।
27 दिन में 650 किलोमीटर का सफर
करीब 27 दिनों से जारी इस यात्रा में वे अब तक लगभग 650 किलोमीटर का सफर तय कर छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के कुसुमकसा पहुंचा, आगे उन्हें अभी लंबी दूरी तय करनी है।
कुसुमकसा में हुआ स्वागत

जैसे ही गांव वालों को इस यात्रा की जानकारी मिली, कुसुमकसा के धर्मप्रेमी एवं भाजपा कार्यकर्ता संजय बैस, राम-जानकी सेवा समिति के अध्यक्ष संतोष जैन, कमलकांत साहू, पुष्पजीत बैस, देवराज जैन, राहुल जैन और मोनू गुप्ता ने सीताराम का स्वागत किया। उन्हें फल, पानी और लस्सी पिलाकर सेवा की गई और उनके संकल्प की सराहना की गई।
संजय बैस ने कहा कि ऐसे उदाहरण कम देखने को मिलते हैं, जहां लोग कठिन परिस्थितियों में भी अपने विश्वास पर अडिग रहते हैं।
संकल्प के साथ निकले यात्रा पर
सीताराम ने बताया कि राम मंदिर अयोध्या बनने के बाद उन्होंने पैदल जाकर दर्शन करने का संकल्प लिया था, जिसे वे अब पूरा कर रहे हैं।
यह यात्रा आस्था और संकल्प का उदाहरण मानी जा रही है।
“जिसका नाम ही सीताराम हो, उसका अयोध्या से जुड़ाव स्वाभाविक है।”


