Dhamtari जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां परीक्षा के तनाव ने एक मासूम छात्रा की जिंदगी छीन ली। 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली 17 वर्षीय छात्रा ने महज दो पेपर खराब होने के कारण आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।
भखारा थाना क्षेत्र के ग्राम भेलवाकुदा में रहने वाली वैष्णवी साहू…एक ऐसी बेटी, जिसके सपनों में उज्ज्वल भविष्य था, आंखों में उम्मीदें थीं…लेकिन परीक्षा के दबाव ने उसकी मुस्कान हमेशा के लिए छीन ली।
बताया जा रहा है कि वैष्णवी 11वीं कक्षा की छात्रा थी। 9 तारीख को वह अपना आखिरी पेपर देकर घर लौटी थी। घर पहुंचते ही पिता ने जब उससे परीक्षा के बारे में पूछा, तो उसने धीमे स्वर में बताया-
“दो पेपर अच्छे नहीं गए…”
बस, यही बात उसके मन में घर कर गई।
धीरे-धीरे वह गुमसुम रहने लगी…ना किसी से बात, ना किसी में दिलचस्पी…परिवार ने शायद इसे सामान्य तनाव समझा, लेकिन अंदर ही अंदर वह टूटती जा रही थी।
14 तारीख को घर के सभी सदस्य एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने बाहर गए थे…वैष्णवी घर में अकेली थी…इसी दौरान उसने अपने कमरे में दुपट्टे का फंदा बनाया…और एक ऐसा फैसला ले लिया, जिसने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी।
जब परिजन लौटे, तो घर का मंजर देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई…उनकी लाडली… फंदे से लटकी हुई थी…चीख-पुकार, आंसू और मातम…हर तरफ सिर्फ दर्द ही दर्द था।
एक सवाल… जो सबको सोचने पर मजबूर करता है
क्या वाकई एक परीक्षा…किसी की पूरी जिंदगी से बड़ी हो सकती है?
वैष्णवी की कहानी सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। आज भी कई बच्चे परीक्षा के दबाव में टूट जाते हैं, लेकिन हम उनके दर्द को समझ नहीं पाते।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। मामले की जांच जारी है।
एक बेटी…
जिसके सपनों को उड़ान भरनी थी…
आज वो खामोश हो गई…
याद रखिए- एक परीक्षा का रिजल्ट जिंदगी नहीं होता।
जरूरत है बच्चों को समझने की, उनसे बात करने की, और उन्हें यह भरोसा दिलाने की कि
हार-जीत से बढ़कर उनकी जिंदगी की कीमत है।


