नई दिल्ली: 16 अप्रैल 2026 को संसद के विशेष सत्र में, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) के तहत 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने से जुड़े तीन अहम संविधान संशोधन विधेयक पेश किए गए। इसके तहत लोकसभा में सीटें बढ़ाकर ~850 करने का प्रस्ताव है, जिससे महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होंगी।
संसद में पेश किए गए महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति भी तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष इसके प्रावधानों और लागू करने के तरीके पर सवाल खड़े कर रहा है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस बिल को “महिलाओं को सशक्त बनाने वाला ऐतिहासिक फैसला” बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील की है।
वहीं, कांग्रेस ने समर्थन के साथ शर्तें भी रख दी हैं।
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कहा कि ओबीसी महिलाओं के लिए अलग प्रावधान और जातिगत जनगणना के बिना यह बिल अधूरा है।
समाजवादी पार्टी भी इस मुद्दे पर सरकार से सहमत नजर नहीं आई।
SP प्रमुख Akhilesh Yadav ने इसे सभी वर्गों के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं बताते हुए बदलाव की मांग की।
इधर, आम आदमी पार्टी ने साफ रुख अपनाया है।
AAP संयोजक Arvind Kejriwal ने कहा कि बिल को तुरंत लागू किया जाना चाहिए, ताकि महिलाओं को जल्द इसका लाभ मिल सके।
नोट: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं पर आधारित है, जिनकी आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्तर पर हो सकती है।


