तेज वाणी Digital..डेस्क
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक मां ने ही अपने ढाई साल के मासूम बेटे को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
जंगल के रास्ते बना मौत का सफर
घटना कापू थाना क्षेत्र के ग्राम पारेमेर फिटिंगपारा की है। 16 अप्रैल की सुबह जब पिता बोधसाय मंझवार जंगल काम के लिए निकले थे, तब घर में पत्नी सोनमती अपने दोनों बच्चों के साथ थी।
शाम होते-होते 4 साल की बेटी अकेली घर लौटी और बताया कि मां छोटे भाई को लेकर नानी घर जाने जंगल के रास्ते निकली है।
यह सुनते ही पिता के मन में अनहोनी की आशंका पैदा हो गई। ग्रामीणों के साथ देर रात तक खोजबीन हुई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
गहरी खाई में मिला मासूम का शव
17 अप्रैल को मां सोनमती अकेली घर लौटी, लेकिन बेटे के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। शक गहराता गया।
लगातार तलाश के बीच 18 अप्रैल की रात रानीगौवा पहाड़ के पास एक पत्थर पर खून के निशान मिले। नीचे गहरी खाई में मासूम अनुज का शव पड़ा था-सिर पर गहरे घाव, मानो किसी ने बेरहमी से कुचल दिया हो।
अपहरण की झूठी कहानी से गुमराह
शव मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती पूछताछ में आरोपी मां ने अपहरण की झूठी कहानी गढ़कर सभी को गुमराह करने की कोशिश की।
लेकिन जब पुलिस ने सख्ती दिखाई, तो सच्चाई सामने आ गई-और वो सच्चाई किसी भी इंसान को भीतर तक हिला देने वाली थी।
पैदल नहीं चल पाने पर बना कातिल इरादा
पुलिस पूछताछ में सोनमती ने कबूल किया कि वह बच्चों को लेकर मायके जा रही थी। रास्ते में उसने बेटी को वापस भेज दिया और बेटे को गोद में लेकर आगे बढ़ी।
पहाड़ी चढ़ाई के दौरान थकान से परेशान होकर उसने बेटे को नीचे उतारा और चलने को कहा।
जब मासूम चल नहीं पाया और जमीन पर बैठ गया-तो मां का गुस्सा हैवानियत में बदल गया।
उसने पहले बच्चे को जमीन पर पटका, फिर बड़े पत्थर से उसके सिर पर बार-बार वार कर उसकी हत्या कर दी।
सलाखों के पीछे पहुंची कातिल मां
पुलिस के अनुसार घटना को अंजाम देने के बाद वह घर लौटकर झूठी कहानी सुनाती रही।
बहरहाल पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया। घटना में प्रयुक्त पत्थर सहित अहम साक्ष्य जब्त किए गए और आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
शर्मसार
शर्मसार
एक मां, जिसे ममता की मूरत कहा जाता है… वही जब कातिल बन जाए, तो समाज के लिए यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक गहरी चेतावनी है।
यह घटना सवाल खड़ा करती है-क्या गुस्सा इंसान को इतना अंधा कर सकता है कि वह अपने ही खून का कत्ल कर दे?


