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CG प्लांट हादसा: 16 मजदूरों की मौत, अपनों की तलाश में भटकते परिजन, हर आंख नम

“प्रतीकात्मक तस्वीर”

Chhattisgarh के सक्ती जिले स्थित वेदांता प्लांट में हुए भीषण हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। अब तक 16 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 34 लोग घायल हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद हर तरफ चीख-पुकार, बेचैनी और अपनों को खोजते परिजनों का मार्मिक दृश्य देखने को मिल रहा है।

मार्मिक ग्राउंड रिपोर्ट

सक्ति जिले के इस औद्योगिक क्षेत्र में मंगलवार को हुआ धमाका सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ देने वाली त्रासदी बन गया।

मृतकों के शव अलग-अलग स्थानों पर रखे गए हैं—

  • रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में 5 शव
  • जिला अस्पताल में 5 शव
  • प्लांट परिसर के भीतर 4 शव
  • Raipur के कालड़ा अस्पताल में 2 मजदूरों की मौत

वहीं 18 घायलों का इलाज रायगढ़ जिले के अलग-अलग अस्पतालों में जारी है, जिनमें कई की हालत गंभीर बनी हुई है।

“सुबह मिली लाश…” – एक परिवार की दर्दनाक कहानी

इस हादसे के बाद सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिजनों की है, जो अपने अपनों की तलाश में अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।

Jharkhand के खूंटी जिले से आए दीपक कुमार की कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है। हादसे की खबर मिलते ही वह अपने साले की तलाश में रायगढ़ पहुंचे।

उन्होंने सबसे पहले फोर्टिस अस्पताल जाकर जानकारी जुटाई, लेकिन वहां कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने एक-एक कर कई अस्पतालों के चक्कर लगाए।

रात 3 बजे से शुरू हुई यह तलाश सुबह करीब 7:30 बजे खत्म हुई… जब जिला अस्पताल में उन्हें अपने साले का पार्थिव शरीर मिला।

यह खबर मिलते ही उनके परिवार में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे माहौल में सिर्फ दर्द और सन्नाटा छाया हुआ है।

“सुरक्षा होती तो जानें बच जाती…”

हादसे के बाद एक अन्य परिजन विमल ने प्लांट प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि—
👉 “अगर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते, तो इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों की जान नहीं जाती।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद भी मौके पर जरूरी व्यवस्था समय पर नहीं की गई, जिससे हालात और बिगड़ गए।

दूसरे राज्यों से पहुंच रहे परिजन

इस दर्दनाक घटना के बाद अब अन्य राज्यों से भी मजदूरों के परिजन रायगढ़ पहुंचने लगे हैं।
हर कोई अपने घायल या लापता परिजनों की जानकारी जुटाने में लगा हुआ है।

अस्पतालों के बाहर भीड़, रोते-बिलखते लोग और अपनों की तलाश में भटकते परिवार… यह मंजर हर किसी को झकझोर देने वाला है।

वेदांता प्लांट का यह हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के सपनों के टूटने की कहानी बन गया है।
अब सबकी नजर जांच और जिम्मेदारों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी है… लेकिन जिन घरों के चिराग बुझ गए, वहां यह दर्द शायद कभी कम नहीं होगा।

(समाचार जारी… हर अपडेट के लिए जुड़े रहें)

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