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CG: अवांछित गर्भ या सामाजिक डर? सूने घर में मिली नवजात ने खड़े किए बड़े सवाल

डिजिटल डेस्क |

सूने घर में नवजात को छोड़ फरार हुई मां, समय पर मदद से बची मासूम की जान

गर्भपात और जागरूकता पर उठे बड़े सवाल

एमसीबी जिले के च्यूल गांव की घटना ने झकझोरा, स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक जागरूकता की कमी आई सामने

छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के भरतपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत च्यूल से एक बेहद संवेदनशील और सोचने पर मजबूर करने वाली घटना सामने आई है। एक सुनसान मकान में नवजात शिशु के मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। यह घटना न सिर्फ मानवता को झकझोरती है, बल्कि गर्भपात, अवांछित गर्भ और सामाजिक जागरूकता जैसे गंभीर मुद्दों पर भी सवाल खड़े करती है।

जानकारी के अनुसार, किसी अज्ञात महिला ने सुनसान घर में बच्चे को जन्म दिया और जन्म के तुरंत बाद नवजात को वहीं छोड़कर फरार हो गई। देर रात करीब 12 बजे जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को रोने की आवाज सुनाई दी, तो वह मितानिन के साथ मौके पर पहुंचीं। घर के अंदर एक नवजात बच्ची ठंड में असहाय अवस्था में पड़ी हुई रो रही थी।

मानवता की मिसाल पेश करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों और ग्रामीणों ने तुरंत बच्ची को कपड़े में लपेटा और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को बेहतर देखभाल के लिए सिविल अस्पताल मनेन्द्रगढ़ रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार नवजात अंडरवेट है और उसका वजन लगभग 1.9 किलोग्राम है, फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव रमन ने बताया कि बच्ची को रात 2:41 बजे अस्पताल लाया गया था और लगातार निगरानी में रखा गया है। मामले की सूचना महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल संरक्षण इकाई को भी दे दी गई है।

जागरूकता की कमी या सामाजिक डर?

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है

क्या यह मामला अवांछित गर्भ का था?

क्या महिला को सुरक्षित और कानूनी गर्भपात की जानकारी नहीं थी?

या फिर सामाजिक दबाव और डर ने उसे ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किया?

भारत में सुरक्षित और कानूनी गर्भपात की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इसकी जानकारी का अभाव है। कई महिलाएं सामाजिक बदनामी, परिवार के दबाव या जानकारी की कमी के चलते ऐसे खतरनाक फैसले ले लेती हैं, जिससे मां और बच्चे दोनों की जान खतरे में पड़ जाती है।

जरूरी है जागरूकता और सहयोगविशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है।

गर्भावस्था से जुड़े सही मार्गदर्शनसुरक्षित और कानूनी गर्भपात की जानकारीमहिलाओं के लिए काउंसलिंग और सहयोगगोपनीय स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धताइन सभी पहलुओं पर ध्यान देना होगा, ताकि कोई भी महिला मजबूरी में ऐसा अमानवीय कदम न उठाए।

घटना के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच में जुट गए हैं। संबंधित महिला की तलाश की जा रही है, ताकि इस घटना के पीछे के कारणों का पता लगाया जा सके।

एक तरफ शर्मनाक, दूसरी तरफ उम्मीदजहां एक ओर यह घटना समाज को शर्मसार करती है, वहीं दूसरी ओर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मियों की तत्परता ने एक मासूम की जान बचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की है।

(नोट: ऐसी घटनाएं हमें सिर्फ खबर नहीं, बल्कि समाज में बदलाव की जरूरत का संकेत देती हैं। जागरूक बनें, सहयोग करें, और किसी भी संकट में सही मदद लें।)

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