हाईकोर्ट ने साजिश का एंगल माना, CBI की अपील स्वीकार; ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटाछत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आखिरकार बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में अहम सुनवाई करते हुए पूर्व विधायक अमित जोगी को दोषी करार दिया है और उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की अपील को स्वीकार करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट तौर पर माना कि हत्या के पीछे साजिश का एंगल मौजूद था।
ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा
इस केस में पहले ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन CBI ने इस फैसले को चुनौती दी थी। जांच एजेंसी ने करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की, जिसमें हत्या से जुड़े कई अहम सबूत शामिल थे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया।
क्या बोले अमित जोगी?
फैसले के बाद अमित जोगी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें पूरी तरह से सुनवाई का अवसर नहीं मिला और यह निर्णय उनके लिए “अप्रत्याशित” है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे आगे कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे।परिजनों का आरोपमृतक रामावतार जग्गी के परिजनों की ओर से सतीश जग्गी ने कोर्ट में पहले ही इसे राजनीतिक साजिश बताया था। उनका आरोप था कि यह हत्या पूरी तरह से सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी।
CBI की जांच और साजिश का एंगल
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने अपनी जांच में कई तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए थे। कोर्ट ने भी माना कि यह मामला सामान्य हत्या का नहीं, बल्कि साजिश के तहत किया गया अपराध है।
राजनीति में हलचल तयइस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज होने के आसार हैं। एक बड़े राजनीतिक चेहरे को दोषी ठहराए जाने से आने वाले समय में इसका असर राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।


