राकेश मिश्रा@ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के मरवाही इलाके में इन दिनों हाथियों की मौजूदगी लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। पिछले कई दिनों से तीन हाथियों का दल क्षेत्र में लगातार विचरण कर रहा है। इसी बीच देर रात दो हाथी अचानक मरवाही के कन्या छात्रावास परिसर में जा पहुंचे, जिसके बाद प्रशासन और वन विभाग में हड़कंप मच गया।
हाथियों ने छात्रावास की बाउंड्रीवाल को एक-दो नहीं, बल्कि करीब पांच अलग-अलग जगहों से तोड़ दिया। इसके अलावा छात्रावास परिसर में बने गार्ड रूम के दरवाजे और खिड़की को भी नुकसान पहुंचाया गया।
बताया जा रहा है कि छात्रावास परिसर में लगे कटहल की महक हाथियों को अपनी ओर खींच लाई। देर रात जब हाथियों के छात्रावास परिसर में पहुंचने की जानकारी मिली तो प्रशासन और वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए छात्रावास में रह रहे सभी 58 बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। प्रशासन ने देर रात ही सभी बच्चों को सुरक्षित दूसरे छात्रावास में शिफ्ट कर दिया।
गनीमत रही कि हाथियों के छात्रावास परिसर में घुसने के बावजूद किसी भी बच्चे के घायल होने की सूचना नहीं है। वन विभाग और प्रशासन की टीम पूरी रात मौके पर मौजूद रही और हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखती रही।
एक ही दीवार बार-बार बन रही हाथियों का रास्ता!
मामले में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। जिस बाउंड्रीवाल को हाथियों ने इस बार करीब पांच स्थानों से तोड़ा है, उसी दीवार को हाथी पहले भी तोड़कर रास्ता बना चुके हैं।
ऐसे में अब छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर हाथी पहले भी इसी रास्ते से परिसर में प्रवेश कर चुके हैं, तो उनकी दोबारा एंट्री रोकने के लिए स्थायी इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
5 फीट गहरे गड्ढे का सुझाव
हाथियों से छात्रावास की सुरक्षा के लिए छात्रावास अधीक्षक को करीब 5 फीट गहरा गड्ढा खोदकर सुरक्षा उपाय करने के संबंध में मौखिक निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब सबसे बड़ी प्राथमिकता छात्रावास में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा है, क्योंकि जिस परिसर में रात के समय हाथियों की एंट्री हो चुकी है, वहां भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए स्थायी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
फिलहाल तीन हाथियों का दल क्षेत्र में मौजूद बताया जा रहा है, ऐसे में वन विभाग की टीम लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन हाथियों का छात्रावास परिसर में घुसना आने वाले दिनों के लिए प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती जरूर बन गया है।

