बालोद/गुंडरदेही। जिले में पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ियों के अवैध परिवहन पर सवाल लगातार उठते रहे हैं। इसी बीच गुंडरदेही क्षेत्र के ग्राम खलारी में एक निजी जमीन पर बड़ी संख्या में लकड़ियों के गोला मिलने से वन विभाग की कार्रवाई ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
वन विभाग की टीम ने अज्ञात सूचना के आधार पर मौके पर पहुंचकर 55 नग लकड़ी का गोला जब्त की हैं। शुरुआती जांच में इनमें बीजा और अर्जुन प्रजाति की लकड़ी होने की जानकारी सामने आई है। लकड़ियों के वैध दस्तावेज मौके पर नहीं मिले, जिसके बाद वन विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
“साहब, लकड़ी हमारी नहीं… कोई अज्ञात व्यक्ति रख गया!”
बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर लकड़ियां मिली हैं, उसके मालिक दिलीप कुमार देशमुख, निवासी ग्राम खर्रा, गुंडरदेही हैं। वन विभाग की पूछताछ के दौरान जमीन मालिक ने कथित तौर पर बताया कि लकड़ियां किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनकी जमीन पर रखी गई हैं और उन्हें लकड़ी के संबंध में जानकारी नहीं है।
अब यही जवाब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
क्योंकि मामला अगर एक-दो लकड़ियों का होता तो बात अलग थी। यहां तो 55 नग लकड़ियों का गोला मिली हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि इतनी मात्रा में लकड़ी लेकर कोई अज्ञात व्यक्ति जमीन तक आया, उसे रखा और फिर बिना जमीन मालिक को बताए चलता बना… तो क्या लकड़ियां खुद चलकर जमीन तक पहुंचीं?
बेशक इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह कहानी कई सवाल जरूर छोड़ रही है।
मामला और भी दिलचस्प…
सूत्रों से पता चला है कि जमीन मालिक खुद आरा मिल का संचालन करता रहा हैं। इतना ही नहीं, स्थानीय स्तर पर यह भी जानकारी सामने आई है कि पूर्व में अवैध लकड़ी परिवहन करते उनके वाहनों पर कार्रवाई हो चुकी है!
ऐसे में उनकी जमीन पर बड़ी संख्या में बिना दस्तावेज की लकड़ी मिलना वन विभाग के लिए भी सामान्य मामला नहीं माना जा सकता।
एक तरफ जमीन मालिक का कहना है कि लकड़ी उनकी नहीं है और कोई अज्ञात व्यक्ति उसे रख गया, वहीं दूसरी तरफ जमीन का मालिकाना हक और लकड़ी की भारी मात्रा कई सवाल खड़े करती है।
अब असली सवाल यही है कि 55 नग लकड़ी का असली मालिक कौन है और इन्हें जंगल या राजस्व भूमि से काटकर यहां तक कौन लेकर आया?
जिले में अवैध कटाई और परिवहन पर भी सवाल
यह मामला केवल 55 नग लकड़ियों की जब्ती तक सीमित नहीं है। जिले के अलग-अलग इलाकों में लगातार पेड़ों की अवैध कटाई, लकड़ी के परिवहन और बिना वैध दस्तावेज लकड़ी रखने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
वन संपदा की सुरक्षा के लिए विभाग कार्रवाई करता है, लेकिन कार्रवाई के बाद बड़ा सवाल यह रहता है कि जंगल से पेड़ काटने वाला कौन है, लकड़ी को परिवहन करने वाला कौन है और आखिरकार यह लकड़ी पहुंचती कहां है?
अभिषेक अग्रवाल जिला वनमंडल अधिकारी… दिलीप कुमार देशमुख की जमीन पर 55 नग लकड़ियों के गोले मिली हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने लकड़ी के संबंध में जानकारी होने से इनकार करते हुए किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा लकड़ी वहां रखे जाने की बात कही है। फिलहाल लकड़ी को जब्त कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि लकड़ी कहां से लाई गई, किसने जमीन पर रखी और इसका वास्तविक मालिक कौन है।
खलारी की इस कार्रवाई में भी अगर वन विभाग सिर्फ लकड़ी जब्त करने तक सीमित रहता है, तो कहानी अधूरी रह जाएगी। असली काम तो अब शुरू होता है-लकड़ी का स्रोत, परिवहन का रास्ता और वास्तविक मालिक तक पहुंचना।
अब वन विभाग की जांच पर टिकी निगाहें
मौके से जब्त लकड़ियों की प्रजाति, मात्रा और वैध दस्तावेजों की जांच के साथ वन विभाग यह भी पता लगाने में जुटा है कि ये लकड़ियां कहां से लाई गईं और इन्हें जमीन पर किसने रखा।
अगर जमीन मालिक के दावे में सच्चाई है तो अज्ञात व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी होगा। और अगर जांच में लकड़ी का संबंध जमीन मालिक या उनके व्यवसाय से जुड़ता है, तो फिर मामले की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
फिलहाल 55 नग लकड़ियां वन विभाग के कब्जे में हैं और सवालों का पूरा गठ्ठर जांच के हवाले।
जांच सामने आने के बाद ही साफ होगा कि यह मामला सचमुच “किसी और की रखी लकड़ी” का है या फिर कहानी में लकड़ी से ज्यादा कुछ और भी छिपा है।

