अब 7 मिनट में एक एकड़ में खाद और दवाई का छिड़काव
कबाड़ से तैयार किया आधुनिक ट्रैक्टर-चलित कृषि यंत्र, मजदूरों पर निर्भरता घटी, समय और लागत दोनों की हो रही बचत
बालोद। कहते हैं कि सीखने की ललक और कुछ नया करने का जुनून हो तो सीमित संसाधन भी बड़ी सफलता की राह बन जाते हैं। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम अरकार के युवा किसान टिकेन्द्र साहू ने इसी कहावत को सच साबित कर दिखाया है। सोशल मीडिया पर आधुनिक खेती की तकनीक देखकर प्रेरित हुए टिकेन्द्र ने अपने पुराने ट्रैक्टर को देसी तकनीक से ऐसा आधुनिक ट्रैक्टर-चलित कृषि यंत्र बना दिया, जो अब खेतों में मिनटों में खाद और दवाई का छिड़काव कर रहा है। उनकी यह अनोखी पहल अब केवल गांव तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास के जिलों और प्रदेशभर के किसानों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस हाईटेक कृषि यंत्र को तैयार करने के लिए उन्होंने किसी कंपनी की महंगी मशीन नहीं खरीदी। कबाड़ में पड़े लोहे के एंगल, लोहे की पट्टियां, पुराने पार्ट्स और घर में रखे 250 लीटर के नीले ड्रम सहित कई अन्य सामग्रियों का उपयोग कर अधिकांश उपकरण स्वयं तैयार किए। करीब दो महीने की लगातार मेहनत के बाद उनका सपना हकीकत में बदल गया।
सोशल मीडिया से मिली प्रेरणा, घर पर तैयार कर दी आधुनिक मशीन

युवा किसान टिकेन्द्र साहू बताते हैं कि उन्होंने सोशल मीडिया पर पंजाब और हरियाणा के किसानों को ट्रैक्टर के माध्यम से आधुनिक तरीके से खेती करते देखा। कम समय में बड़े क्षेत्र में खाद और दवाई का छिड़काव करने वाली तकनीक ने उन्हें बेहद प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए इस तकनीक की बारीकियां सीखीं और बाजार से तैयार मशीन खरीदने के बजाय खुद ही इसे बनाने का फैसला किया।
उन्होंने जरूरत के कुछ सामान बाजार से खरीदे, जबकि अधिकांश सामग्री कबाड़ से जुटाई और अपने घर पर ही पुराने ट्रैक्टर को आधुनिक ट्रैक्टर-चलित कृषि यंत्र में बदलने का काम शुरू कर दिया।
पहियों को बदलना था सबसे बड़ी चुनौती
इस मशीन को तैयार करने में सबसे बड़ी चुनौती खड़ी फसल को नुकसान से बचाना था। इसके लिए ट्रैक्टर के सामान्य पहियों की जगह कम चौड़ाई वाले विशेष पहिए तैयार किए गए, ताकि फसल दबे बिना ट्रैक्टर आसानी से खेत में चल सके। पहली कोशिश असफल रही, लेकिन दूसरी बार सफलता मिली और आखिरकार आधुनिक ट्रैक्टर-चलित कृषि यंत्र तैयार हो गया।
क्या है इस देसी हाईटेक मशीन की खासियत?

इस कृषि यंत्र में हाई प्रेशर पंप मशीन, स्प्रे के लिए दो इटालियन गन, 250 लीटर क्षमता का पानी का ड्रम, खेत से सीधे पानी भरने के लिए अलग पंप और ट्रैक्टर के पीछे खाद रखने के लिए विशेष टैंक लगाया गया है। इससे दवाई और खाद का समान रूप से छिड़काव किया जा सकता है।
सबसे बड़ी बात यह है कि यह सिस्टम ट्रैक्टर पर स्थायी रूप से फिट नहीं है। इसे लगभग एक घंटे में लगाया या हटाया जा सकता है। इसके बाद ट्रैक्टर का उपयोग सामान्य कृषि कार्यों के लिए भी किया जा सकता है।
सिर्फ 6 से 7 मिनट में एक एकड़ खेत का छिड़काव
टिकेन्द्र साहू बताते हैं कि इस तकनीक की मदद से महज 6 से 7 मिनट में एक एकड़ खेत में खाद और दवाई का छिड़काव पूरा हो जाता है। इससे मजदूरों की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हुई है। समय पर कृषि कार्य होने के साथ-साथ लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
पिता का मिला पूरा साथ, तभी सपना हुआ साकार

युवा किसान टिकेन्द्र साहू का कहना है कि इस मशीन को तैयार करने में उनके पिता तुलसीराम साहू और दादा ने हर कदम पर उनका साथ दिया। आर्थिक सहयोग से लेकर तकनीकी कार्यों तक उन्होंने बेटे का हौसला बढ़ाया। करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की लागत से दो महीने में यह कृषि यंत्र तैयार हुआ, जिसने खेती को पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान बना दिया।
पिता तुलसीराम साहू बताते हैं कि उनका परिवार गर्मी के मौसम में करीब 60 से 70 एकड़ में खेती करता है। सबसे बड़ी परेशानी मजदूरों की कमी थी। बेटे ने जब यह मशीन बनाने का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने उस पर पूरा भरोसा किया और हर संभव सहयोग दिया। आज उसी विश्वास और मेहनत का परिणाम है कि खेती का काम आसान हो गया है और मजदूरों पर निर्भरता भी काफी कम हो गई है।
कृषि विभाग ने भी की सराहना

ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सोमदास साहू ने युवा किसान की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में खेती की सबसे बड़ी चुनौती मजदूरों की कमी है। कई बार समय पर खाद और दवाई का छिड़काव नहीं होने से उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसे में कम लागत में तैयार यह तकनीक किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है और आधुनिक खेती को नई दिशा देगी।
बालोद के युवा किसान टिकेन्द्र साहू ने यह साबित कर दिया है कि नई तकनीक सीखने की इच्छा, नवाचार की सोच और परिवार का सहयोग हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव संभव है। उनका यह देसी नवाचार अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बनता जा रहा है और आधुनिक कृषि की दिशा में एक नई मिसाल पेश कर रहा है।

