छत्तीसगढ़/ बालोद। जिले के डौंडी लोहारा विकासखंड अंतर्गत सेमहरडीह और रायपुरा गांव इन दिनों संभावित खनन परियोजना को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। भारत सरकार की नवरत्न कंपनी एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) को क्षेत्र में फॉस्फोराइट और चूना पत्थर खनिज की खोज के लिए कंपोजिट लाइसेंस मिलने के बाद प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों और ग्राम पंचायतों ने प्रस्तावित सर्वे एवं बोर ड्रिलिंग कार्य को लेकर गंभीर आशंकाएं जताते हुए अपनी असहमति व्यक्त की है।
जानकारी के अनुसार, तहसील कार्यालय की ओर से ग्राम पंचायतों को पत्र जारी कर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मांगा गया है। दस्तावेजों में कंपनी द्वारा भूवैज्ञानिक परीक्षण एवं खनिज अन्वेषण (प्रॉस्पेक्टिंग और ड्रिलिंग) की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। प्रशासन इसे प्रारंभिक सर्वे और परीक्षण की सामान्य प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि यह भविष्य में बड़े खनन प्रोजेक्ट की शुरुआत हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में खनिज भंडार मिलने की पुष्टि होती है तो आने वाले समय में बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां शुरू हो सकती हैं, जिससे कृषि भूमि, जल स्रोत, वन क्षेत्र और स्थानीय आबादी प्रभावित हो सकती है।
ग्राम पंचायतों में आयोजित बैठकों के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से अपनी चिंता जाहिर की है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि देश के कई हिस्सों में पहले सर्वे और परीक्षण के नाम पर कार्य शुरू हुआ और बाद में बड़े खनन प्रोजेक्ट अस्तित्व में आ गए। इसी अनुभव के आधार पर स्थानीय लोग सतर्क हैं।
खेती-किसानी पर निर्भर ग्रामीणों को अब अपनी जमीन और भविष्य की चिंता सताने लगी है। लोगों का कहना है कि कृषि भूमि ही उनके जीवनयापन का सबसे बड़ा सहारा है। ऐसे में सर्वे के बाद संभावित खनन की आशंका ने विस्थापन का डर बढ़ा दिया है।
सेमहरडीह के सरपंच डेविड बारले ने कहा कि ग्राम सभा में इस विषय पर चर्चा की गई थी, जहां अधिकांश ग्रामीणों ने सहमति नहीं दी। उनका कहना है कि टेस्टिंग और सर्वे के नाम पर एनओसी मांगी जाती है और बाद में उसी आधार पर खनन गतिविधियां शुरू होने की आशंका रहती है।
दस्तावेजों में यह भी संकेत मिला है कि रायपुरा और सेमहरडीह के अलावा आसपास के अन्य गांव भी संभावित रूप से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में यह मामला अब केवल दो गांवों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में चिंता और बहस का विषय बन गया है।
फॉस्फोराइट का उपयोग उर्वरक निर्माण में होता है, जबकि चूना पत्थर सीमेंट उद्योग का प्रमुख आधार है। ऐसे में खनिज संसाधनों की खोज और उपयोग राष्ट्रीय विकास की आवश्यकता मानी जाती है।
किन्तु विकास और उद्योग के साथ-साथ स्थानीय लोगों के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल गांवों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह केवल प्रारंभिक सर्वे है, तो ग्राम सभाओं की आपत्ति के बावजूद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है।


