मौसम अपडेट लोड हो रहा है...
💧
जल ही जीवन है — पानी बचाओ, भविष्य बचाओ
Save Water
ताज़ा खबर
img 20260407 wa0006

GOOD NEWS: जहां गूंजी थीं गोलियां, अब गूंजा “भारत माता की जय”:

धर्मेन्द्र सिंह, सुकमा

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के ताड़मेटला से एक ऐसी प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जो बदलते बस्तर और मजबूत होते लोकतंत्र की कहानी कहती है। जिस धरती पर कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहीं आज “भारत माता की जय” के नारों के साथ शहीदों को नमन किया गया।

76 वीर जवानों को समर्पित ‘शौर्य स्मारक’सोमवार को ताड़मेटला के पास गडगडमेटा गांव में वर्ष 2010 के भीषण नक्सली हमले में शहीद हुए 76 सुरक्षाकर्मियों की स्मृति में बनाए गए भव्य शहीद स्मारक का लोकार्पण किया गया। इस स्मारक का उद्घाटन सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने किया।

इस अवसर पर बस्तर आईजी पी. सुंदरराज, एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया।

दहशत के गढ़ से शांति के प्रतीक तकताड़मेटला वही इलाका है, जिसे कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। वर्ष 2010 में यहां हुआ हमला देश के सबसे घातक हमलों में से एक था, जिसमें सीआरपीएफ के 75 जवान और एक पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।लेकिन आज यह क्षेत्र नक्सलवाद के साए से बाहर निकलकर शांति, विकास और विश्वास का प्रतीक बन चुका है।

कलेक्टर की मौजूदगी, विकास की दस्तकसुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने मौके पर पहुंचकर शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया और कहा—“यह स्मारक हमारे जवानों के अदम्य साहस और ग्रामीणों के विश्वास की जीत है। सुकमा अब शांति और विकास की नई इबारत लिख रहा है।

नक्सल मुक्त बस्तर की ओर बड़ा कदमयह स्मारक ऐसे समय में बनाया गया है, जब हाल ही में बस्तर क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किया गया है। सुरक्षा बलों, प्रशासन और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयासों से यह बदलाव संभव हो पाया है।

अब नई पहचान: विकास और विश्वासआज सुकमा की पहचान गोलियों की आवाज से नहीं, बल्कि विकास की पदचाप से हो रही है। ताड़मेटला का यह शहीद स्मारक आने वाली पीढ़ियों को वीर जवानों के बलिदान और क्षेत्र के साहस की गाथा सुनाता रहेगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *