कटघोरा में ‘कांस्य’ की जगह ‘सीमेंट’ की प्रतिमा का विवाद गहराया, अजय चंद्राकर ने पूरे प्रदेश में जांच और कड़ी कार्रवाई की उठाई मांग
रायपुर/कटघोरा। छत्तीसगढ़ के कटघोरा में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रस्तावित कांस्य प्रतिमा के स्थान पर कथित तौर पर सीमेंट की प्रतिमा स्थापित किए जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर विवाद का रूप ले चुका है।
इस मामले को लेकर भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कांस्य प्रतिमा के नाम पर सीमेंट की प्रतिमा स्थापित की गई है, तो यह केवल तकनीकी लापरवाही नहीं बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितता और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ का मामला है। उन्होंने सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

मीडिया से चर्चा के दौरान अजय चंद्राकर ने कहा कि मामले में एक उप अभियंता (सब इंजीनियर) को निलंबित किया गया है, लेकिन इतनी बड़ी अनियमितता के लिए केवल एक अधिकारी पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रतिमा निर्माण और स्थापना की पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर स्वीकृतियां और निगरानी होती है, तो जिम्मेदारी केवल एक कर्मचारी तक सीमित कैसे हो सकती है।
भाजपा विधायक ने मांग की कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी की सभी प्रतिमाओं का तकनीकी परीक्षण कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कहीं भी गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
इधर, कटघोरा की प्रतिमा को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक माहौल भी गर्मा दिया है। विपक्ष इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बना रहा है, जबकि अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस पूरे मामले की जांच किस स्तर तक कराती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
फिलहाल यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट तथा सरकारी कार्रवाई पर सभी की निगाहें रहेंगी।

