जब सड़क नहीं बनी तो खेत बना दी सड़क!” भैसबोड़ के ग्रामीणों ने सड़क पर चलाया हल, की धान की रोपाई कर जताया अनोखा विरोध
बालोद। जिले के भैसबोड़ गांव में वर्षों से सड़क निर्माण का इंतजार कर रहे ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। प्रशासनिक स्वीकृति और कार्यादेश जारी होने के बावजूद जब सड़क का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने सड़क पर हल चलाकर धान की रोपाई कर दी और प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की।
दरअसल, भैसबोड़ गांव में राम मंदिर से मड़ई चौक तक लगभग ₹16 लाख 15 हजार की लागत से सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया था। इस सड़क के निर्माण के लिए मंडी बोर्ड से 12 दिसंबर 2024 को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी, जबकि 4 सितंबर 2025 को कार्यादेश भी जारी कर दिया गया था। नियमानुसार इस कार्य को तीन माह के भीतर पूर्ण किया जाना था, लेकिन आज तक सड़क निर्माण कार्य शुरू तक नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष सड़क निर्माण की मांग रख चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। बरसात के दिनों में यह सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन की उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने बुधवार को सड़क पर उतरकर पहले हल चलाया और फिर धान की रोपाई करते हुए अपना विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि जब सड़क बन ही नहीं रही है तो इसे खेत ही मान लिया जाए। उनका यह विरोध अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया गया तो उनका आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान मनाबाई सलाम, युवराज भारद्वाज, बालाराम नेताम, भीखम दास, अजीत राम निर्मलकर, नवीन कुमार, राजकुमार निषाद, दशरथ राम, महेश विश्वकर्मा, बलदेव नेताम, कलेंद्री बाई कोरार्म, सवाना बाई सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

