दल्लीराजहरा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शहीद अस्पताल ने पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को जोड़ते हुए एक ऐसी पहल की, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। अस्पताल प्रबंधन ने इस खास दिन को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए धरातल पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। एक ओर नवजात शिशुओं की माताओं को मुनगा (सहजन) के पौधे भेंट किए गए, वहीं दूसरी ओर शहर के खाली और बंजर मैदानों में 1200 से अधिक सीड बम बिखेरकर हरियाली की नई उम्मीद बोई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत अस्पताल के पीएनसी वार्ड से हुई, जहां डिस्चार्ज होने वाली सभी प्रसूता महिलाओं को मुनगा के पौधे भेंट किए गए। इस अवसर पर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जाना ने माताओं और उनके परिजनों को मुनगा के औषधीय एवं पोषण संबंधी गुणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुनगा केवल एक पौधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का खजाना है। इसके पत्ते, फलियां और अन्य हिस्से पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो विशेष रूप से धात्री माताओं और छोटे बच्चों के लिए बेहद लाभकारी हैं। यह कुपोषण से लड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

डॉ. जाना ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि हमारा वातावरण स्वच्छ और हराभरा होगा तो समाज भी स्वस्थ रहेगा। इसलिए हर व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए।
इसके बाद अस्पताल की टीम ने पर्यावरण संरक्षण को व्यवहारिक रूप देने के लिए वार्ड क्रमांक 16 स्थित लाल मैदान का रुख किया। यहां अस्पताल के कर्मचारियों, माली और ट्रेनी सिस्टर्स द्वारा तैयार किए गए लगभग 1200 सीड बम खाली और बंजर भूमि पर गुलेल मारकर फेंके गए। सीड बम एक ऐसी तकनीक है जिसमें मिट्टी के छोटे गोलों के भीतर बीज सुरक्षित रखे जाते हैं। बारिश की पहली बूंदों के साथ ये बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेने लगते हैं।

इन सीड बमों में आम, कटहल, सीताफल, अशोक, हर्रा, बहेड़ा और अन्य स्थानीय प्रजातियों के बीज शामिल किए गए थे, ताकि भविष्य में यह क्षेत्र हरियाली से आच्छादित हो सके और जैव विविधता को बढ़ावा मिल सके। अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि यदि इनमें से बड़ी संख्या में बीज अंकुरित होते हैं तो आने वाले वर्षों में यह बंजर इलाका एक हरित क्षेत्र में बदल सकता है।
अस्पताल की इस पहल ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। नवजात शिशु के जन्म की खुशी को पौधारोपण से जोड़कर और सीड बम अभियान चलाकर शहीद अस्पताल ने पर्यावरण संरक्षण का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो समाज के अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

स्थानीय नागरिकों ने अस्पताल की इस अनूठी पहल की जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह हर संस्था और नागरिक पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, स्वस्थ और हराभरा भविष्य मिल सकता है।


