रिपोर्ट: दुर्गेश यादव / जांजगीर-चांपा
Raipur: भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। देश के शांत कहे जाने वाले राज्य छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान समर्थित ‘स्लीपर सेल’ के एक संदिग्ध सदस्य को गिरफ्तार किया है। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों और राज्य पुलिस की इस संयुक्त सतर्कता ने देश के भीतर एक बड़े आतंकी नेटवर्क और संभावित ‘टारगेट किलिंग’ (लक्षित हत्याओं) की साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है।
यह कार्रवाई न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के लिहाज से एक टर्निंग पॉइंट मानी जा रही है, क्योंकि सरहद से हजारों किलोमीटर दूर बैठे आतंकियों के मददगार अब देश के भीतरी राज्यों में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
किरायेदार सत्यापन (Tenant Verification) बना सुरक्षा कवच: ऐसे हुआ भंडाफोड़
जांजगीर-चांपा के एसपी विजय कुमार पांडेय के निर्देशन में अकलतरा थाना क्षेत्र के मिनीमाता चौक पर पुलिस टीम ‘किरायेदार सत्यापन अभियान’ चला रही थी। राजीव केडिया नामक व्यक्ति के मकान में रह रहे बाहरी राज्यों के लोगों की जांच के दौरान पुलिस का सामना सेवक सिंह (23 वर्ष) से हुआ।
मूल रूप से पंजाब के भारत-पाकिस्तान सीमाई जिले तरन तारण (थाना पट्टी) का रहने वाला सेवक सिंह छत्तीसगढ़ में छिपकर रह रहा था। पूछताछ के दौरान जब उसने गोलमोल जवाब दिए, तो पुलिस का संदेह गहरा गया। इसके बाद जब उसकी प्रोफाइल और डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाले गए, तो पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ गए।
हथियारों की ‘ड्रोन डिलीवरी’ और ‘टारगेट किलिंग’ का खौफनाक प्लान
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस मामले का सबसे खतरनाक पहलू ‘ड्रोन ऑपरेशन्स’ और ‘टारगेट किलिंग’ से जुड़ा है।
- सरहद पार से हथियार: प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी सेवक सिंह को पाकिस्तान सीमा से ड्रोन के माध्यम से अत्याधुनिक हथियार डिलीवर किए जाने की योजना थी।
- लक्षित हत्याओं की साजिश: पाकिस्तान में बैठे इसके आकाओं (ISI समर्थित नेटवर्क) द्वारा इसे छत्तीसगढ़ और देश के अन्य हिस्सों में महत्वपूर्ण व्यक्तियों और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने (टारगेट किलिंग) का काम सौंपा जाना था। हथियार मिलने से ठीक पहले पुलिस ने इसे दबोच लिया।
छत्तीसगढ़ के VIPs और संवेदनशील ठिकानों की रेकी: डिजिटल साक्ष्य बरामद
आरोपी के पास से जब्त मोबाइल फोन देश की सुरक्षा के खिलाफ एक बड़े ‘डिजिटल हथियार’ के रूप में सामने आया है। पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों को शुरुआती जांच में जो मिला है, वह बेहद डराने वाला है:
- विदेशी नंबरों से संपर्क: आरोपी के फोन में पाकिस्तान, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के संदिग्ध नंबर मिले हैं।
- संवेदनशील डेटा लीक: वह व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण व्यक्तियों (VIPs), संवेदनशील स्थानों की लाइव लोकेशन, वाहनों के नंबर और तस्वीरें/वीडियो सीमा पार भेज रहा था।
- अभियोजन: पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 (देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना) और धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत अपराध क्रमांक 350/26 दर्ज किया है।
सुरक्षा विश्लेषकों की राय: भीतरी राज्यों में ISI का ‘नया पैंतरा’
रक्षा और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब और कश्मीर में सुरक्षा बलों की भारी मुस्तैदी के कारण अब आईएसआई (ISI) और पाकिस्तानी आतंकी संगठन देश के शांत और मध्य राज्यों (जैसे छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश) को सुरक्षित ठिकाना बना रहे हैं। यहां वे ‘स्लीपर सेल’ के रूप में रहकर स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स, रेकी और हमलों की रूपरेखा तैयार करते हैं।
“यह मामला केवल एक संदिग्ध की गिरफ्तारी का नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाले तत्व अब देश के सुदूर इलाकों में भी पैठ बना चुके हैं। स्थानीय पुलिस का किरायेदार सत्यापन अभियान यहां देश के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित हुआ।”
केंद्रीय एजेंसियां संभाल सकती हैं कमान?
मामले की संवेदनशीलता, अंतरराष्ट्रीय कड़ियों (International Links) और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के सीधे जुड़ाव को देखते हुए इस बात की प्रबल संभावना है कि जल्द ही केंद्रीय जांच एजेंसी NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) इस मामले को अपने हाथ में ले सकती है। फिलहाल आरोपी का मोबाइल फोरेंसिक लैब भेजा गया है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट के बाद देशव्यापी स्तर पर कई और बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


