बालोद। आज जब आधुनिकता की दौड़ में प्रकृति और पर्यावरण लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं, ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम टिकरी के युवाओं ने विश्व पर्यावरण दिवस पर एक ऐसी अनूठी पहल की, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। युवाओं ने केवल पौधरोपण तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि वृक्षों के महत्व को भावनात्मक रूप से समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गांव के युवाओं ने एक वृक्ष को माँ का स्वरूप देकर उसे साड़ी पहनाई, श्रृंगार किया और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया। साड़ी में सजा वृक्ष बिल्कुल एक माँ की तरह प्रतीत हो रहा था, मानो वह अपनी संतानों को छांव, जीवन और संरक्षण देने के लिए खड़ी हो। इस दृश्य ने उपस्थित ग्रामीणों को भावुक कर दिया।
युवाओं का कहना था कि जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, उन्हें जीवन देती है और हर संकट से बचाती है, उसी प्रकार वृक्ष भी मानव जीवन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध हवा, फल, छाया और जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। इसलिए वृक्षों को केवल पेड़ नहीं, बल्कि जीवनदायिनी माँ के रूप में सम्मान देने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर गायत्री मंत्रों के साथ वृक्ष की पूजा-अर्चना की गई और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की देखभाल करने का संकल्प भी लिया।
गांव के सरपंच पति रितेश देवांगन और ग्रामीणों ने युवाओं की इस अभिनव सोच की जमकर सराहना की। उनका कहना था कि पर्यावरण बचाने का संदेश यदि भावनाओं से जोड़ा जाए तो उसका प्रभाव लोगों के दिलों तक पहुंचता है। युवाओं की यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के अटूट रिश्ते को समझाने का सशक्त माध्यम बनी।
आज जब बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते हरित क्षेत्र पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं, तब ग्राम टिकरी के युवाओं का यह प्रयास समाज को यह संदेश देता है कि यदि हम वृक्षों को परिवार का हिस्सा मानकर उनका संरक्षण करें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और हराभरा भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर माँ के रूप में सजे इस वृक्ष ने यह संदेश दिया कि “जिस तरह माँ के बिना परिवार अधूरा है, उसी तरह वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना भी अधूरी है।


