तीन मजदूरों की मौत के बाद मुआवजा और नौकरी पर सहमति, लेकिन अब नए सवाल खड़े
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की लौह अयस्क नगरी दल्ली राजहरा में 12 मई को हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन, BSP प्रबंधन और ठेकेदार के बीच मृतकों के परिजनों को मुआवजा और नौकरी देने को लेकर लिखित सहमति बन चुकी है। लेकिन अब इस पूरे मामले में CSR राशि को लेकर नया विवाद और सवाल खड़े होने लगे हैं।
दरअसल टाउनशिप क्षेत्र में सीवरेज पाइपलाइन बदलने के दौरान मिट्टी धंसने और नगर पालिका की पानी पाइपलाइन गिरने से तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश देखने को मिला। मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने BSP प्रबंधन और ठेकेदार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। इसके बाद बुधवार को प्रशासन, BSP प्रबंधन और ठेकेदार के बीच लंबी चर्चा हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर लिखित सहमति बनाई गई।
लिखित सहमति के अनुसार सीवरेज पाइपलाइन कार्य करा रहे ठेकेदार द्वारा प्रत्येक मृतक परिवार को 5 लाख 50 हजार रुपये देने की बात तय हुई। इसमें तत्काल राहत के तौर पर 50 हजार रुपये मौके पर दिए गए, जबकि शेष 5 लाख रुपये 20 से 25 दिनों के भीतर देने पर सहमति बनी।
इसके अलावा BSP प्रबंधन ने प्रत्येक मृतक परिवार के एक सदस्य को दो माह के भीतर माइंस कांट्रैक्ट जॉब आधारित नौकरी देने और 50 हजार अतिरिक्त आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन भी दिया। वहीं जिला प्रशासन की ओर से श्रमिक पंजीयन के आधार पर 5 लाख रुपये तक की सहायता तथा पंजीयन नहीं होने की स्थिति में 1 लाख रुपये श्रम विभाग से दिलाने की बात कही गई।
लेकिन इसी बीच क्षेत्रीय विधायिका अनिला भेड़िया द्वारा दिए गए बयान ने पूरे मामले में नया सवाल खड़ा कर दिया है। विधायिका का कहा हैं कि लापरवाही तो हुई है चाहे ठेकादार की कहे या प्रबंधन की वो तो जांच में पता चलेगा। बैठक में प्रभावित परिवार से सहमति बनाई गई हैं और मैं प्रशासन से प्रभावित परिवारों को CSR मद से दो-दो लाख की मांग की हुँ जो नियम प्रक्रिया के तहत ही उसे प्रशासन द्वारा दिया जाएगा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासन, BSP प्रबंधन और ठेकेदार के बीच पूरी सहमति लिखित रूप में तैयार की गई थी, तो उसमें CSR राशि का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
क्या CSR से सहायता देने की बात केवल मौखिक स्तर तक सीमित है? यदि प्रशासन और प्रबंधन वास्तव में CSR फंड से सहायता देने पर सहमत थे, तो उसे लिखित दस्तावेज में शामिल क्यों नहीं किया गया?
इसी बात को लेकर अब स्थानीय लोगों और मृतक परिवारों के बीच संशय की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि जब एक ओर लिखित सहमति में मुआवजा और नौकरी के सभी बिंदु दर्ज किए गए हैं, तो CSR सहायता जैसी महत्वपूर्ण बात को बाहर रखना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कहीं मृतकों के परिजनों को अलग-अलग आश्वासन देकर गुमराह करने की कोशिश तो नहीं की जा रही? क्योंकि प्रशासनिक सहमति पत्र में CSR का उल्लेख नहीं है, जबकि जनप्रतिनिधियों के बयान में इसकी बात कही जा रही है।
वहीं नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू ने भी इस हादसे में ठेकेदार की गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि मजदूरों से बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और सुरक्षा इंतजाम के काम कराया जा रहा था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल मुआवजा और नौकरी को लेकर लिखित सहमति बनने से परिवारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन CSR राशि को लेकर उठे सवालों ने नई बहस छेड़ दी है।
वहीं सोशल मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हादसे के बाद पूरे मामले में लापरवाही को लेकर BSP प्रबंधन द्वारा आयरन ओर माइंस टाउनशिप के डीजीएम मंगेश सेलकर और एजीएम टाउनशिप सर्विसेस रमेश कुमार हेडऊ को सस्पेंड किए जाने की चर्चा है।

