बिना सुरक्षा 10 फीट गहरे गड्ढे में उतारे मजदूर, पाइपलाइन धंसने से तीन जिंदगियां खत्म
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की लौह अयस्क नगरी दल्ली राजहरा में मंगलवार को हुआ दर्दनाक हादसा अब कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। सीवरेज पाइपलाइन बदलने के काम के दौरान मिट्टी धंसने और नगर पालिका की पानी पाइपलाइन गिरने से तीन मजदूरों की मौत हो गई, लेकिन इस हादसे के पीछे केवल दुर्घटना नहीं बल्कि बीएसपी मैनेजमेंट और ठेकेदार की गंभीर लापरवाही भी सामने आ रही है।
मंगलवार शाम करीब 5:15 बजे टाउनशिप क्षेत्र में भिलाई स्टील प्लांट यानी BSP द्वारा ठेकेदार के माध्यम से सीवरेज पाइपलाइन डालने का काम कराया जा रहा था। इसके लिए करीब 8 से 10 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था, जिसमें मजदूरों को उतारकर काम कराया जा रहा था। इसी दौरान चैन माउंटेन मशीन की चैन टूट गई और मशीन अनबैलेंस होकर जमीन की ओर धंसने लगी। मशीन के दबाव से पास से गुजर रही नगर पालिका की पेयजल पाइपलाइन मिट्टी सहित भरभराकर नीचे गिर गई और नीचे काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए।
हादसा इतना भयावह था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते तीन मजदूर मिट्टी और पाइपलाइन के नीचे दब गए। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और बीएसपी की टीम मौके पर पहुंची और नगरवासियों की मदत से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब 5 घंटे तक लगातार मशक्कत के बाद मजदूरों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मृतकों की पहचान बैसाखीन बाई उम्र लगभग 50 वर्ष निवासी दल्ली राजहरा, किशुन सोरी उम्र 54 वर्ष निवासी दल्ली राजहरा और राकेश दास मानिकपुरी निवासी ग्राम भैंसबोड़ के रूप में हुई है। देर रात तीनों शवों को बाहर निकालकर मरचुरी भेजा गया, जिनका पोस्टमार्टम कर बुधवार को परिजनों को सौंपा जाएगा।
लेकिन इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल मजदूरों की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि मजदूरों को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के गहरे गड्ढे में उतारा गया था। ना हेलमेट, ना सेफ्टी बेल्ट, ना मजबूत सपोर्ट सिस्टम और ना ही मिट्टी धंसने से रोकने के लिए सुरक्षा बैरिकेडिंग की उचित व्यवस्था थी। इतनी बड़ी खुदाई के बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी आखिर किसके इशारे पर की गई, यह अब जांच का विषय बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए होते तो शायद तीन मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी। मजदूरों को जिस तरह जोखिम भरे हालात में काम कराया जा रहा था, उसने बीएसपी और ठेकेदार दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीएसपी के जीएम जयप्रकाश ने हादसे को लेकर कहा कि कार्य के दौरान चैन माउंटेन मशीन की चैन टूटने से जमीन धंसने लगी और इसी कारण नगर पालिका की पाइपलाइन मिट्टी सहित मजदूरों पर गिर गई। हालांकि जब मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और सेफ्टी उपकरणों को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने जांच के बाद ही कुछ कहने की बात कही।
वहीं बालोद पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने भी प्रथम दृष्टया सुरक्षा में लापरवाही की बात स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि BSP द्वारा ठेकेदार के माध्यम से पाइपलाइन बिछाने का काम कराया जा रहा था और हादसे के दौरान मजदूर गहरे गड्ढे में काम कर रहे थे। इसी दौरान मिट्टी धंसने से तीन मजदूरों की मौत हुई। मामले में सेफ्टी मानकों की जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मजदूरों की जिंदगी से इतना बड़ा खिलवाड़ क्यों किया गया? क्या काम की जल्दी और लागत बचाने के चक्कर में मजदूरों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया? और अगर सुरक्षा इंतजाम पूरे थे तो फिर तीन मजदूरों की मौत कैसे हो गई?
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि मजदूर सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, जिसने BSP प्रबंधन और ठेकेदार की जिम्मेदारी को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
क्या BSP मैनेजमेंट और ठेकेदार मृतकों के परिजनों को देंगे नौकरी और मुआवजा?
दल्ली राजहरा में सीवरेज पाइपलाइन हादसे में तीन मजदूरों की मौत के बाद अब लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इन मजदूरों की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा और क्या BSP मैनेजमेंट व ठेकेदार मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा और नौकरी देंगे?


